अपने मामा की लड़की को चोदा


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मेरा नाम अमित है और मैं चंडीगढ़ का रहने वाला हूं, मेरे पिताजी एक डॉक्टर हैं और मेरी मां ग्रहणी है वह घर पर ही रहती हैं और बचपन से ही उन्होंने मेरा ध्यान रखा है क्योंकि मेरे पिताजी के पास समय नहीं होता है इस वजह से मेरी मां ने ही मुझ पर ध्यान दिया। मेरी उम्र 25 वर्ष की हो चुकी है और मेरी बड़ी बहन की शादी कुछ समय पहले ही हुई थी। उसने अपने पसंद के लड़के से शादी की और उन दोनों की लव मैरिज हुई है, उसका पति भी डॉक्टर है और मेरी बहन भी एक डॉक्टर है इसीलिए उन दोनों ने एक दूसरे को पसंद किया और जब उन दोनों ने एक दूसरे को पसंद कर लिया था तो उन्होंने मेरे पिताजी से इस बारे में बात की, मेरे पिताजी ने उन्हें मना नहीं किया क्योंकि मेरे जीजाजी भी डॉक्टर हैं और वह उनके ही प्रोफेशन के हैं इसीलिए उन्होंने शादी के लिए हां करदी। मेरी बहन की शादी हम लोगों ने जयपुर में करवाई और वहां पर हम लोगों ने बड़े धूमधाम से उसकी शादी करवाई।

हमने शादी में किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं की क्योंकि हमारे परिवार में अधिकतर लोक डॉक्टर हैं। हम लोगों ने जयपुर में ही शादी अरेंज करवाई और वहां पर हमने बहुत ही अच्छे से शादी करवाई। जब मेरी बहन की शादी हो गई तो उसके बाद मैं उसे बहुत मिस करता हूं और हमेशा ही उसे फोन करता रहता हूं। वह भी मुझे फोन करती है और मेरा हाल-चाल पूछती रहती है। मैंने अपने कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद अपना ही एक बिजनेस खोलने की सोची।  मेरे पिताजी ने मुझे कभी भी किसी चीज के लिए दबाव नहीं डाला क्योंकि मुझे डॉक्टर नहीं बनना था इसलिए मैंने उनसे पहले ही इस बारे में बात कर ली थी। वह कहने लगे कि यदि तुम्हे डॉक्टर नहीं बनना तो तुम अपने हिसाब से देख लो, तुम्हें जैसा उचित लगता है वह तुम देख लो इसीलिए मैंने अपने कॉलेज की पढ़ाई करने के बाद अपना एक स्टार्टअप खोल लिया। मैंने जब अपना काम शुरू किया तो मेरे पिताजी और मेरी बहन ने ही मेरी आर्थिक रूप से मदद की, उन्होंने ही मुझे मेरा काम खोलने के लिए पैसे दिए थे। मैंने अपना एक स्टोर खोला है और मैं ऑनलाइन सामान सप्लाई करवाता हूं। मेरे जितने भी संपर्क में मेरे मित्र और मेरे रिश्तेदार है वह सब मुझसे ही सामान खरीदते हैं।

मेरा काम ठीक चल रहा है लेकिन मुझे उससे इतना मुनाफा नहीं होता जितना मैंने सोचा था इसीलिए मैं अपने काम को धीरे धीरे बढ़ा रहा हूं ताकि मेरा काम अच्छे से चल पाए। मैं जब भी घर पर होता हूं तो मेरे पिताजी मुझसे हमेशा ही इस बारे में पूछते हैं कि तुम्हारा काम कैसा चल रहा है, मैं उन्हें हमेशा ही बताता हूं मेरा काम अच्छा चल रहा है, अभी शुरुआत में कुछ समय और लगेगा लेकिन मेरा काम अच्छा चलने लगेगा। वह भी मुझसे बहुत खुश रहते हैं और कहते हैं कि तुम अपने काम में बहुत ज्यादा मेहनत करते हो क्योंकि मेरे पिताजी को मेरे बारे में पता है कि मैं जब एक बार किसी चीज को ठान लेता हूं तो उसे पूरा कर के ही छोड़ता हूं इसीलिए मेरे पिताजी हमेशा ही मुझे यह बात कहते हैं कि तुम जरूर अपने काम में अच्छा कर लोगे। वह मुझसे हमेशा पूछते हैं यदि तुम्हे किसी भी समय पैसे की जरूरत हो तो मुझसे बेझिझक कह देना लेकिन मैं नहीं चाहता कि अब मैं उनसे पैसे लूं। मैंने उनसे पहले ही काफी पैसे ले लिए थे और मुझे  वो पैसे उन्हें लौटाने भी है, मैं नहीं चाहता कि मैंने अपनी बहन और अपने पिताजी से जो मदद ली है वह मैं अपने पास रख हूं इसीलिए मैं उन्हें पैसे लौटाना चाहता हूं। मेरा काम ठीक-ठाक चल रहा है उसमें ना तो मेरा मुनाफा होता है और ना ही मेरा घाटा हो रहा है। मेरा कॉलेज में एक बहुत अच्छा दोस्त है जिसका नाम निखिल है, वह अक्सर मेरे स्टोर में बैठने के लिए आ जाता है और जब वह मेरे साथ होता है तो मुझे समय का बिल्कुल भी पता नहीं चलता। हम दोनों बैठ कर अपने कॉलेज के दिन की मस्ती याद कर लेते हैं। जब मैं घर गया तो मेरे मामा की लड़की नमीता आई हुई थी, मैंने उससे पूछा कि तुम इतने समय बाद यहां पर कैसे आ गई। वह कहने लगी कि मैं चंडीगढ़ से ही अपनई पढ़ाई कर रही हूं इसलिए मैं यहीं पर रहने वाली हूं।

मैंने उसे कहा यह तो बहुत अच्छी बात है मैंने उससे कहा कि तुमने मुझे एक बार भी नहीं बताया कि तुम हमारे घर पर आ रही हो और ना ही मुझे इस बारे में मामा ने कुछ बताया। मेरे मामा दिल्ली में रहते हैं और वह भी डॉक्टर हैं। नमिता भी अपनी डॉक्टरी की पढ़ाई करने के लिए ही चंडीगढ़ आई है। हम दोनों काफी देर तक साथ में बैठे हुए थे और मुझे समय का बिल्कुल भी पता नहीं चला। मैंने नमिता से कहा कि तुम फ्रेश हो लो, अभी कुछ देर में पापा भी आते ही होंगे। वह फ्रेश हो गई, उसके कुछ समय बाद मेरे पापा भी आ गए। मेरे पापा भी नमिता से मिलकर बहुत खुश हुए और फिर हम लोगों ने खाना खाया और हम सब लोग सो गए। अब नमिता हमारे साथ ही रहती थी और मेरे पिताजी मुझसे पूछते थे कि तुम्हारा काम कैसा चल रहा है, उसी वक्त नमिता ने भी मुझ से पूछा कि तुमने भी अपना नया काम शुरू किया है, मुझे इस बारे में पापा ने बताया था। नमिता मुझसे पूछने लगी कि तुम्हारा काम कैसा चल रहा है, मैंने उसे बताया कि मेरा काम  ठीक-ठाक चल रहा है, ना तो उसमें मेरा मुनाफा हो रहा है और ना ही मेरा घाटा हुआ। मैंने नमीता से कहा तुम भी कभी मेरे स्टोर पर आकर कुछ सामान ले जाओ। वह कहने लगी कि बिल्कुल, तुम मुझे अपने साथ ले जाना मैं तुम्हारे स्टोर से सामान खरीद कर लुंगी।

जब नमिता ने मुझसे यह कहा तो मैं उसे अगले दिन ही अपने स्टोर में ले गया और उसने मेरे स्टोर से काफी सामान खरीद लिया। अब वह मेरे साथ ही बैठी हुई थी उसी वक्त निखिल भी आ गया, जब मैंने निखिल को नमिता से मिलाया तो वह दोनों आपस में बातें करने लगे। मैंने उनसे पूछा क्या तुम दोनों कभी एक दूसरे से मिले हो, तो वह दोनों कहने लगे नहीं, यह हमारी पहली मुलाकात है। अब मैं जोर-जोर से हंसने लगा और उन्हें कहने लगा कि मुझे तो बिल्कुल भी तुम दोनों को देखकर ऐसा नहीं लग रहा कि तुम दोनों की पहली मुलाकात है। नमिता और निखिल भी बहुत तेज हंसने लगे और कहने लगे कि हमें तो लगा कि तुम कुछ और ही बोलने वाले हो इसीलिए नमिता और निखिल की अब अच्छी दोस्ती हो चुकी है। नमीता भी अब अपने मेडिकल कॉलेज में पढ़ने के लिए जाती है और वहां शाम को ही घर लौट पाती है। जब वह शाम को घर आती है तो उसी वक्त मेरी उससे बात होती है, हम दोनों बैठ कर बातें करते हैं। मैं हमेशा ही नमिता से पूछता हूं कि तुम्हारा आज का दिन कैसा था, वह कहती है कि मेरा दिन बहुत ही अच्छा था और वह मुझसे भी पूछती है कि तुम्हारा काम कैसा चल रहा है, मैं उससे हमेशा ही कहता हूं कि मेरा काम बहुत अच्छा चल रहा है क्योंकि मेरा काम अच्छे से चलने लगा था इसलिए मैं भी अपने काम से खुश था और मेरे पिताजी भी बहुत खुश थे। वो कहने लगे कि तुम ऐसे ही मेहनत करते रहो तुम्हे जरूर अच्छी सफलता मिलेगी। मैं उन लोगों को हमेशा कहता था कि यदि आप लोग इसी प्रकार से मेरा सपोर्ट करते रहेंगे तो मेरा काम जरूर अच्छे से चलने लगेगा। नमिता भी मुझे बहुत सपोर्ट करती है और मुझे बहुत अच्छा लगता है जब वह भी मुझे सपोर्ट करती है, वह बहुत ही खुश दिल और अच्छी लड़की है। वह अपने कॉलेज की पढ़ाई में ही बिजी थी और जब शाम को वह घर आती तो उस वक्त मैं भी घर आता था क्योंकि मुझे भी घर जाने में काफी लेट हो जाती थी और नमिता भी लेट से ही घर आती थी। एक दिन हम दोनों अपने कमरे में थे उस दिन मैं नमिता के साथ ही बैठा हुआ था हम दोनों बैठ कर मूवी देख रहे थे तभी बीच में एक सिम चल पड़ा है उस में लडका लडका दोनों आपस में किस करते हैं और यह सब देख कर मेरा भी मूड खराब हो गया था। मैंने नमिता के पैर पर हाथ रख दिया और उसके जांघो को मैं सहलाने लगा।

मैंने जब उसके जांघो को सहलाया तो वह पूरे मूड में आ गई वह समझ चुकी थी। उसने पहले तो मेरे हाथ को अपने पैरों से हटा दिया लेकिन मैंने दोबारा से उसके पैर पर हाथ रख दिया और उसे सहलाने लगा तो उसके अंदर की गर्मी बाहर आने लगी और मैंने भी उसे अपनी बाहों में ले लिया। जब मैंने उसे अपनी बाहों में लिया तो मैंने उसके नरम और मुलायम होठों को चूसना शुरू कर दिया उसे भी मेरे होठो को चूमने में बड़ा मजा आ रहा था वह भी अब मेरा पूरा साथ दे रही थी। मैंने उसके होठों को अपने होठों में लेकर बहुत अच्छे से चूसा और काफी देर तक मैं उसके होठों का रसपान करता रहा। जब मैंने उसकी जींस को उतारा तो उसने पिंक कलर की पैंटी पहनी हुई थी मैंने जैसे ही उसकी पैंटी को उतारा तो उसकी योनि से पानी बाहर की तरफ निकल रहा था और मैंने जब अपनी जीभ को उसकी योनि पर लगाया तो वह पूरी गीली हो रखी थी। मैंने उसके तरल पदार्थ को चाटना शुरू कर दिया अब वह पूरी मचलने लगी और मैंने जल्दी से अपने लंड को उसकी योनि में डाल दिया जैसे ही मेरा लंड नमिता की योनि के अंदर घुसा तो वह चिल्ला उठी मैंने उसके दोनों पैरों को कसकर पकड़ लिया उसे मैं धक्के मारने लगा। मैंने उसे इतनी तेज धक्के मारे उसका बदन पूरा गर्म होने लगा था और उसकी योनि से बहुत ज्यादा तरल पदार्थ बाहर की तरफ निकल रहा था। वह अपने मुंह से सिसकियां ले रही थी लेकिन मैं उसकी योनि की गर्मी को ज्यादा समय तक बर्दाश्त नहीं कर पाया 10 मिनट तक मैने उसे धक्के मारे और उसके बाद मेरा माल उसकी योनि के अंदर ही गिर गया उसके दिन के बाद से हम दोनों हमेशा ही सेक्स करते हैं।